भारत के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक ICICI Bank Ltd ने सितंबर 2025 तिमाही (Q2 FY26) के नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक ने ₹12,359 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹11,746 करोड़ के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। बाजार की उम्मीदों से बेहतर यह नतीजे बैंक की मजबूत वित्तीय स्थिति और बेहतर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को दिखाते हैं। विश्लेषकों ने बैंक का मुनाफा करीब ₹12,236 करोड़ तक रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन ICICI Bank ने उम्मीदों को पार कर लिया।
कम प्रावधानों ने बढ़ाया मुनाफा
ICICI Bank Q2 Results में सबसे बड़ी राहत प्रावधानों (Provisions) में कमी के रूप में देखने को मिली है। इस तिमाही में बैंक ने केवल ₹914 करोड़ का प्रावधान रखा, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 26 प्रतिशत कम है। खराब कर्ज (Bad Loans) के लिए बनाए जाने वाले इन प्रावधानों में कमी का सीधा असर बैंक के नेट प्रॉफिट पर पड़ा, जिससे निचली पंक्ति यानी बॉटम लाइन मजबूत हुई। यह दर्शाता है कि बैंक का लोन पोर्टफोलियो स्थिर और बेहतर दिशा में जा रहा है।
ट्रेजरी इनकम में गिरावट, लेकिन अन्य आय में सुधार
इस बार बैंक की ट्रेजरी इनकम में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल सितंबर तिमाही में जहां यह ₹680 करोड़ थी, वहीं इस बार यह घटकर ₹220 करोड़ रह गई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते निवेश पोर्टफोलियो पर दबाव देखा गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि बैंक की अन्य आय (Other Income) 5 प्रतिशत बढ़कर ₹220 करोड़ पर पहुंच गई, जिससे समग्र राजस्व संतुलित बना रहा।
नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 7.4% की बढ़त
ICICI Bank की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) – यानी ब्याज से होने वाली वास्तविक कमाई – इस तिमाही में 7.4 प्रतिशत बढ़कर ₹21,529 करोड़ पर पहुंच गई। बैंक के अनुसार, घरेलू ऋण (Domestic Advances) में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) को दिए गए लोन में सबसे तेज़ ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं, रिटेल और कॉरपोरेट लोन सेगमेंट में भी स्थिर वृद्धि रही। इसके साथ ही बैंक के डिपॉजिट्स (Deposits) में 7.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो बैंक की मजबूत कस्टमर बेस को दर्शाता है।
नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) स्थिर रहा
बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 4.3 प्रतिशत पर स्थिर रहा है। इसका अर्थ है कि बैंक ने अपनी ब्याज दरों को संतुलित बनाए रखा है, भले ही बाजार में ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला हो। यह स्थिरता बैंक की ब्याज दर प्रबंधन रणनीति की मजबूती को दर्शाती है।
एसेट क्वालिटी में सुधार
ICICI Bank की एसेट क्वालिटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) घटकर 1.58 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि पिछली तिमाही में यह 1.67 प्रतिशत था। GNPA में यह गिरावट बताती है कि बैंक का लोन पोर्टफोलियो अधिक सुरक्षित और स्थिर हो गया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
क्रेडिट ग्रोथ में धीरे-धीरे सुधार
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में पिछले कुछ महीनों में क्रेडिट डिमांड (Loan Demand) में सुधार देखने को मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में यह ग्रोथ और तेज़ हो सकती है, खासकर तब जब सरकार ने टैक्स रिफॉर्म्स और GST दरों में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। इससे उपभोग और निवेश दोनों को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिसका सीधा फायदा बैंकिंग सेक्टर को होगा।
RBI की ब्याज दरों में कटौती का असर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस साल अब तक 100 बेसिस पॉइंट तक ब्याज दरों में कमी की है। इसका उद्देश्य आर्थिक ग्रोथ को गति देना है। हालांकि, ब्याज दरों में कमी से लोन की मांग तो बढ़ती है, लेकिन इससे बैंकों के मार्जिन (NIM) पर हल्का दबाव भी बनता है क्योंकि लोन रेट जल्दी घटते हैं जबकि डिपॉजिट रेट घटाने में समय लगता है। इसके बावजूद, ICICI Bank ने अपने मार्जिन को स्थिर बनाए रखा है, जो इसकी दक्ष वित्तीय रणनीति को दर्शाता है।
ICICI Bank Q2 Results से यह साफ है कि बैंक एक स्थिर और ग्रोथ-उन्मुख पथ पर आगे बढ़ रहा है। कम प्रावधान, मजबूत NII और बेहतर एसेट क्वालिटी ने बैंक के प्रदर्शन को मजबूती दी है। आने वाली तिमाहियों में बैंक के लिए ग्रोथ की संभावनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं, खासकर तब जब क्रेडिट डिमांड में तेजी आएगी और रिटेल लोन सेगमेंट और मजबूत होगा।
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